Parijat ka ped कैसा होता है?

भारतीय संस्कृति में parijat ka ped बहुत ही पूज्यनीय माना जाता हैं। पारिजात के पेड़ के फूलों का उपयोग भगवान हरि के श्रृंगार के लिए किया जाता हैं। आइए जानते हैं क्या है पारिजात का पेड़ और इसके पुष्प कैसे होते हैं ?

परिचय 

Parijaat ka ped लगभग 20 से 25 मीटर ऊंचा होता हैं। पारिजात के पेड़ में एक बार में बहुत अधिक मात्रा में फूल खिलते हैं। Parijat ka ped विशेषकर मध्य भारत में और हिमालय की तराईओ वाले क्षेत्रों में अधिक पाया जाता है। Parijat ka ped भगवान हरि को बहुत ही प्रिय होता हैं, और इसके फूलो का हार बनाकर भगवान हरि विष्णु को श्रृंगार के रूप में चढ़ाया जाता हैं। इस कारण इसे हरसिंगार के नाम से भी जाना जाता हैं।

बहुत से लोगो का कहना है कि Parijat ka ped छूने मात्र से ही सारी थकान को दूर कर देता हैं। पारिजात का फूल या फिर हरसिंगार का फूल पश्चिम बंगाल का राजकीय पुष्प भी माना जाता हैं। Parijat ka ped के फूल तने जड़ सभी का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता हैं।पारिजात के पेड़ के फूल सफेद रंग के होते हैं और हल्के से नारंगी भी दिखाई देते हैं।

पारिजात के फूलों की कुछ खास विशेषताएं

  • Parijat ka ped दिखने में बहुत ही आकर्षक और मनमोहक होता हैं।
  • पारिजात के पेड़ के फूल बहुत ही सुगंधित होते हैं और इसे हरि के श्रृंगार के लिए भी उपयोग किया जाता हैं। 
  • पारिजात के फूलों का दुसर्क़ नाम रात की रानी हैं, क्योंकि यह केवल रात में ही खिलते हैं, और सुबह होते हैं यह झड़ जाते हैं। 
  • पारिजात के फूल जितने ज्यादा मात्रा में खिलते हैं और इनको जितनी अधिक मात्रा में तोड़ा जाता हैं, दूसरे दिन यह उससे अधिक मात्रा में फिर से खिल जाते हैं।
  • Parijat ka ped बाग बगीचों में और घर के आंगन में विशेष रुप से साज – सज्जा के तौर पर लगाया जाता हैं यह बहुत ही सुंदर प्रतीत होता हैं।

Parijat ka ped और उसके फायदे

  • पारिजात का पेड़ एक औषधि की तरह माना जाता हैं। इसके इस्तेमाल से पाचन तंत्र को स्वस्थ रखा जा सकता हैं।
  • पारिजात का उपयोग करके हम पेट के कीड़े की बीमारी बुखार आदि को ठीक कर सकते हैं ।
  • पारिजात का पेड़ लीवर की परेशानी और मूत्र रोग जैसे विकारों को दूर करने में मदद करता हैं।

औषधीय गुण

पारिजात के पेड़ के औषधीय गुण बहुत ही कम जानते हैं। पारिजात के पेड़ के फूलों का उपयोग ना केवल हरि के सिंगार के लिए किया जाता हैं, बल्कि औषधि के रूप में भी किया जाता हैं। 

  • डैंड्रफ की परेशानी – जिन लोगों को बालों से संबंधित समस्या हैं। जिनके बाल में बहुत ही ज्यादा रूसी हैं उन्होंने बहुत सारे उपाय जरूर किए होंगे पर उन्हें कोई खास फर्क दिखाई नहीं दिया होगा हरसिंगार का उपयोग कर बालों की रूसी से छुटकारा पा सकते हैं इसके लिए आप पारिजात के पेड़ के बीज को पीसकर उसका पेस्ट बना लें और इसको बालों पर लगाएं इससे रूसी की समस्या से राहत मिलेगी ।
  • वाणी या फिर जीभ की परेशानी – पारिजात के इस्तेमाल से जीत की समस्या या फिर गलशुण्डी से जुड़ी समस्या को दूर कर सकते हैं जीभ के नीचे एक घंटी जैसा छोटा सा मांस होता है उसे गलशुण्डी कहते हैं।
  • खांसी की परेशानी – पारिजात के पेड़ की छाल का चूरण बनाकर लगभग 500 mg की मात्रा में इसका सेवन करें। Parijat ka ped का उपयोग करके आप खांसी को कम कर सकते हैं।
  • नाक से खून बहने की समस्या – पारिजात के वृक्ष की जड़ को मुंह में रखकर चबाने से कान और नाक से बहने वाला खून बंद हो जाता हैं।
  • पेट के कीड़े या फिर पटार की परेशानी – पेट से संबंधित समस्या से निजात पाने के लिए हरसिंगार के पेड़ के ताजे पत्तों को तोड़कर उसका रस निकाल ले फिर उसे चीनी के साथ मिलाकर लगभग 5ml की मात्रा होनी चाहिए।
  • फोड़े फुंसी या पिंपल्स की परेशानी – माथे पर या फिर चेहरे पर फोड़े फुंसी की समस्या होती हैं। इसको ठीक करने के लिए पारिजात के पेड़ के बीच का पेस्ट बनाकर उसको फोड़े फुंसी की जगह या फिर माथे पर लगाने से पिंपल्स ठीक हो जाते हैं ।
  • घाव को सुखाने के लिए – पारिजात के बीज का पेस्ट बनाकर घावों पर लगा दे ऐसा करने से यह घावों को जल्द से जल्द सूखा देता हैं।
  • मधुमेह – पारिजात डायबिटीज के इलाज के लिए भी बहुत ही लाभदायक होता हैं। Parijat ka ped बहुत ही उत्तम स्त्रोत माना जाता है मधुमेह के रोगियों के लिए। इसका काढ़ा बनाकर पीने से मधुमेह नियंत्रण में रहता है इसकी मात्रा लगभग 20 से 30 एम एल की होनी चाहिए।

नुकसान

Parijat ka ped देव वृक्ष की तरह माना जाता हैं। इसका कोई भी नुकसान नहीं है। यह हमारे स्वास्थ्य के लिए, हमारे बालों के लिए, त्वचा के लिए और कई बीमारियों के लिए बहुत ही लाभकारी सिद्ध होता हैं। इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है ऐसे हम घर के आंगन में भी लगा सकते हैं जिससे हमारा घर सुगंधित होता है और यह सकारात्मक ऊर्जा को उत्पन्न करता हैं। Parijat ka ped लगाने से हमें इसके लाभ उठा सकते हैं

Parijat ka ped और उसके धार्मिक महत्व

Parijat ka ped धार्मिक दृष्टि से भी बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता हैं। पारिजात के फूलों का उपयोग माता सीता भी करती थी आइए जानते हैं

  • माता सीता को पारिजात के फूल बहुत आकर्षक लगते थे। इसी कारण वह पारिजात के पेड़ के फूलों से ही श्रृंगार करती थी ।
  • माता लक्ष्मी से भी पारिजात का संबंध है माता लक्ष्मी को पारिजात हरसिंगार का फूल बहुत ही प्रिय होता हैं।
  • ऐसा मान्यता हैं कि पारिजात का फूल माता लक्ष्मी की पूजा में चढ़ाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न हो जाती हैं।
  • शास्त्रों में कहा गया है कि हरसिंगार (पारिजात) के पेड़ की उत्पत्ति समुद्र मंथन के समय में हुई थी।
  • शास्त्रों के लिखे अनुसार Parijat ka ped भगवान इंद्रदेव ने अपनी वाटिका में लगाया था।
  • पारिजात के पुष्प बहुत ही सुंदर आकर्षक और मनमोहक होते हैं यह भगवान हरि विष्णु को भी बहुत ही प्रिय होते हैं। इसका उपयोग भगवान हरि के श्रृंगार के लिए भी किया जाता हैं।
  • जो पुष्प पेड़ से गिर जाते हैं केवल उन्हीं का उपयोग पूजा पाठ, भगवान की अर्चना के लिए किया जाता हैं। Parijat ka ped ही वह पेड़ है जिसे कल्पवृक्ष भी कहा जाता है।

निष्कर्ष

Parijat ka ped बहुत ही उत्तम वृक्ष है यह सुगंधित, आकर्षक होता हैं। इसके केवल फायदे ही फायदे हैं। Parijat ka ped सभी को अपने आंगन में जरूर लगाना चाहिए और नकारात्मक ऊर्जा को दूर रखना चाहिए आशा करते हैं आपको हमारी Parijat ka ped पोस्ट पसंद आई होगी।

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पारिजात और हरसिंगार में क्या अंतर है?

परिजात के फूलको ही हरसिंगार कहा जाता है, क्योंकि पारिजात के फूलों को हरि के सिंगार के लिए उपयोग में लाया जाता है। इसलिए इसे हरसिंगार के नाम से भी जाना जाता है। पारिजात और हरसिंगार दोनों एक ही है, भगवान हरि विष्णु को पारिजात के फूल अति प्रिय है, इसलिए उनके श्रृंगार के लिए पारिजात के फूल का उपयोग किया जाता है।

पारिजात वृक्ष की पहचान क्या है?

पारिजात के पेड़ की उत्पत्ति समुद्र मंथन में हुई थी। इसके फूल बहुत ही सुंदर होते हैं, जिनका रंग सफेद होता है। इसमें पांच पंखुड़ियां पाई जाती है। पारिजात के पेड़ की ऊंचाई लगभग 20 से 25 मीटर की होती है हिमालय क्षेत्र में ज्यादा पाया जाता है।

पारिजात का पौधा घर में लगा सकते हैं क्या?

पारिजात के पेड़ को घर में लगाने से वास्तु दोष दूर होता है। यह माता लक्ष्मी के प्रिय फूलों में से एक है। पारिजात के फूल से माता लक्ष्मी की पूजा करने से घर में बरकत बनी रहती है। जो फूल पेड़ से टूट कर गिर चुके है, केवल उन्ही फूलों का उपयोग करना चाहिए।

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